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Monday, 24 December 2018

#तलाश

आजा की अब लाश तेरी गलियों से गुज़र रही है,
देखो मरने के बाद भी हमने रास्ता नही बदला

Wednesday, 19 December 2018

#मुस्कुराना

*तुम भी किसी से मोहब्बत करके देखो,*

 *तुम्हें पता चल जाएगा कि हमने मुस्कुराना क्यों छोड़ दिया।*😔

Monday, 17 December 2018

#मोहब्बत

ज़्बात पे क़ाबू वो भी मोहब्बत में…

तूफ़ान से कहते हो चुपचाप गुज़र जाओ.....

Wednesday, 12 December 2018

#रब

*नसीब में ग़र तू है तो*
*दिल पर तू ही...दस्तक देगा*

*"रब" की दुआओं में क्यूँ शामिल करूं*
*शायद तू ही मेरा "रब" होगा*

Tuesday, 11 December 2018

#प्यार

*चाँद से अपना प्रेम लिखूँ या निंदिया से अपना बैर लिखूँ....*

*तुम तो इस दिल के धड़कन हो फिर तुमको भी कैसे गैर लिखूँ....*...

Monday, 10 December 2018

#दिल

*_रिश्तों_*
*_की बातें बस*
*दिल तक रखना......!_*

*_दिमाग चालाक है,_*
*_हिसाब लगाऐगा...........!!_*
💔

Saturday, 8 December 2018

#इश्क

मुलाकातें जरूरी नहीं है इश्क में...
  मीरा जैसा इश्क तो रूह से किया जाता है..

#इश्क इबादत

चाहत से फतेह कर लो, नजरों से करम फरमाओ ...!

इश्क़ इबादत है मेरी, हर दुआ में तुम नज़र आओ ...!!

Thursday, 6 December 2018

#इश्क



बस थामे रहना .....तू हाथ मेरा,,,

हम बताएंगे ज़माने को, इश्क की हद क्या होती है ....

Good morning



सुनों जान,

एक coffee पिला दो
और Sugar की जगह....

Coffee में अपना
इश्क़ मिला दो.

Saturday, 1 December 2018

#सुकून

दिल जब भी उदास होता है... तेरा बस इंतजार होता है...!!

आकर तुम सामने बैठो जरा.. सुकून तो.बस तेरे साथ होता है..!!😊

Friday, 30 November 2018

#क्यों

जाने क्यों




जाने क्यूँ,
अब शर्म से,
चेहरे गुलाब नहीं होते।
जाने क्यूँ,
अब मस्त मौला मिजाज नहीं होते।

पहले बता दिया करते थे,
दिल की बातें।
जाने क्यूँ,
अब चेहरे,
खुली किताब नहीं होते।

सुना है,
बिन कहे,
दिल की बात,
समझ लेते थे।
गले लगते ही,
दोस्त हालात,
समझ लेते थे।

तब ना फेस बुक था,
ना स्मार्ट फ़ोन,
ना ट्विटर अकाउंट,
एक चिट्टी से ही,
दिलों के जज्बात,
समझ लेते थे।

सोचता हूँ,
हम कहाँ से कहाँ आगए,
व्यावहारिकता सोचते सोचते,
भावनाओं को खा गये।

अब भाई भाई से,
समस्या का समाधान,
कहाँ पूछता है,
अब बेटा बाप से,
उलझनों का निदान,
कहाँ पूछता है,
बेटी नहीं पूछती,
माँ से गृहस्थी के सलीके,
अब कौन गुरु के,
चरणों में बैठकर,
ज्ञान की परिभाषा सीखता है।

परियों की बातें,
अब किसे भाती है,
अपनों की याद,
अब किसे रुलाती है,
अब कौन,
गरीब को सखा बताता है,
अब कहाँ,
कृष्ण सुदामा को गले लगाता है

जिन्दगी में,
हम केवल व्यावहारिक हो गये हैं,
मशीन बन गए हैं हम सब,
इंसान जाने कहाँ खो गये हैं!

इंसान जाने कहां खो गये हैं....!
🍃🌹🙏🏻

Thursday, 29 November 2018

#मोहब्बत



शुरू करते हैं फिर से "मोहब्बत" तुम चले आओ,
थोड़ा हम बदल जाते हैं थोड़ा तुम बदल जाओ...🍃

Saturday, 24 November 2018

#शिकायतें

*बहुत अंदर तक जला देती है,*
*वो शिकायते जो बया नहीं होती...*